अध्याय 96

फोन रखते ही कैरोलाइन के चेहरे पर मुस्कान खिल उठी, मानो पूरे वजूद में एक उजली-सी चमक फैल गई हो।

अपने ही खून-रिश्ते भी ज़रूरी नहीं कि सच्चा प्यार लौटाएँ। आज से वह इतनी फ़िक्र नहीं करेगी।

उसे बस साप्ताहिक मुलाक़ातों में एक माँ के तौर पर अपनी ज़िम्मेदारी निभानी थी। तलाक़ के काग़ज़ों पर दस्तख़त होते ही...

लॉगिन करें और पढ़ना जारी रखें